小遥17岁
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A | डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चीनी सेना ने गुरुवार को कहा कि हाल ही में हुई सकारात्मक और रचनात्मक सीमा वार्ता के बाद चीन और भारत को अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द बनाए रखना चाहिए। विशेष प्रतिनिधियों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग ई ने 19 अगस्त को नई दिल्ली में सीमा से जुड़े मुद्दों पर 24वें दौर की वार्ता की। चीन के रक्षा प्रवक्ता झांग शियाओगांग ने वार्ता के परिणाम पर पहली बार टिप्पणी करते हुए कहा कि बैठक के दौरान 10 बिंदुओं पर सहमति बनी। दोनों पक्ष राजनयिक और सैन्य माध्यमों से सीमा प्रबंधन और नियंत्रण तंत्र का उपयोग करने पर सहमत हुए। दोनों पक्षों ने सकारात्मक और रचनात्मक भावना से सीमा से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट और गहन विचारों का आदान-प्रदान किया और कई सहमतियों पर पहुंचे।,झांग ने कहा कि चूंकि इस वर्ष चीन और भारत के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ है, इसलिए दोनों पक्षों को द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना चाहिए। दोनों देशों को अपने लिए और अपने पड़ोसियों के लिए आपसी सम्मान और विश्वास, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, साझा विकास और सहयोग की भावना से एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने का सही तरीका तलाशना चाहिए।,डोभाल-वांग वार्ता से पांच ठोस नतीजे सामने आए, जिनमें परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र के तहत एक विशेषज्ञ समूह का गठन करना शामिल था, ताकि सीमा निर्धारण में शीघ्र सफलता हासिल की जा सके। (न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ) यह भी पढ़ें- पीएम मोदी-पुतिन और चिनफिंग की तिकड़ी निकालेगी ट्रंप के टैरिफ का तोड़? SCO शिखर सम्मेलन से जुड़ी पूरी डिटेल。 जागरण संवाददाता, वाराणसी (जेपी पांडेय)। गणेश मंदिर और सीता राम, राधा कृष्ण और सत्यनारायण ट्रस्ट के मकान में कैसे आया मुस्लिमों का नाम यह जान कर आप चौंक जाएंगे। लेकिन, खबर सौ आने सच है। दरअसल पूरा मामला दालमंडी से जुड़ा हुआ है।,यहां पर सड़क, 184 मकान और जमीन के मुआवजे को 215 करोड़ रुपये मिला है। लोक निर्माण विभाग को दालमंडी में मुआवजा देना चुनौती से कम नहीं। पार्षद ने कहा है कि जिला प्रशासन निर्णय ले ताकि सरकार की छवि धूमिल न हो। ,यह भी पढ़ें : औरंगजेब नहीं था ज्ञानवापी का मालिक, पुनरीक्षण याचिका पर वाद मित्र ने दी अदालत में दलील नई सड़क से चौक थाने तक प्रस्तावित 17.5 मीटर सड़क चौड़ीकरण में दालमंडी में एक के बाद एक नए मामले सामने आने लगे हैं। गणेश मंदिर, सीताराम, राधा-कृष्ण व सत्य नारायण ट्रस्ट की जमीन पर मुस्लिम वर्ग के कुछ लोग अपना नाम चढ़वाने के साथ सेवइत बन गए हैं। इतना ही नहीं, पुराने मकान तोड़कर नई बिल्डिंग खड़ी कर दी हैं। नगर निगम कर्मियों की मिलीभगत से मकान नंबर अपने नाम चढ़वा लिया है जबकि मंदिर और ट्रस्ट पर किसी का नाम नहीं चढ़ सकता। इनका नाम कैसे आया, जांच में सच्चाई सामने आएगी।,सड़क चौड़ीकरण को लेकर राजस्व, लोक निर्माण विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीम ने सर्वे शुरू किया तो मंदिर और ट्रस्ट सामने आए। अब नगर निगम अपनी कमियों को छिपाने में लगा है। यह भी पढ़ें : वाराणसी में दो बच्चियों पर कुत्तों के झुंड ने किया हमला, देखकर खड़े हो जाएंगे रोंगटे, देखें वीडियो... दालमंडी सड़क चौड़ीकरण की जद में 184 मकान आए हैं। सड़क बनाने, मकानों और जमीनों का मुआवजा देने के लिए शासन ने करीब 215 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिया है। जद में आए भवन स्वामियों को मुआवजा देने की तैयारी चल रही है। अब लोक निर्माण विभाग चौड़ीकरण की जद में आए मंदिर और मस्जिद को लेकर उच्च अधिकारियों से वार्ता कर रहा है।,मंदिर और ट्रस्ट की जमीन पर नगर निगम में मुसलमान सेवइत दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में लोक निर्माण विभाग को दालमंडी सड़क चौड़ीकरण में मुआवजा देना किसी चुनौती से कम नहीं है। इस बारे में क्षेत्रीय पार्षद इंद्रेश सिंह ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण की जद में आए मकानों में शत्रु संपत्ति, मंदिर, ट्रस्ट और मस्जिद है। जिला प्रशासन को उचित निर्णय लेने की जरूरत है जिससे सरकार की छवि धूमिल नहीं हो।,यह भी पढ़ें : काशी में आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, विकास कार्यों की समीक्षा और राहत कार्यों का लेंगे जायजा नगर निगम कर्मियों की मिलीभगत से हुआ खेल नगर निगम के रिकार्ड और पोर्टल पर सीके 42/100-101 श्रीगणेश जी, ठाकुर जी, विराजमान नयासियान धन्नू लाल, मनोज शुक्ला और निजामुद्दीन दिखा रहा है। इस पर हाउस टैक्स 41750 दर्ज है। मकान नंबर सीके 43/160-159-1-एफ सीताराम श्रीठाकुर राधा कृष्ण, श्रीठाकुर सत्यनारायण जी महाराज मालिक प्रेम शंकर मैनेजिंग ट्रस्टी सेवइत मुंतजिमकार गोपीनाथ ट्रस्टी लेजर मोहम्मद अलाउद्दीन, मोहम्मद सलाउद्दीन दिखा रहा है। इस पर कोई टैक्स नहीं है।,मकान नंबर सीके 43/160-बी सीताराम जी, राधा कृष्ण जी, सत्यनारायण जी महाराज मालिक प्रेम शंकर मैनेजिंग ट्रस्टी सेवइत गोपीनाथ ट्रस्टी लेजर रशिद जाफर, जमाल जाफर, साजिद जाफर, दीवान जाफर आदि नाम है। मंदिर और ट्रस्ट की संपत्ति पर इन लोगों का नाम कैसे आया, इस बात को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है।,यह भी पढ़ें : वाराणसी में बाढ़ के खतरों का जिला प्रशासन थ्री-डी डिजिटल लिडार तकनीक से कर रहा आकलन。
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Published on:12:26:14